अकादमी का इतिहास

श्री नरहरि राव ने 1950 में चैडविक हाउस, शिमला में भा. ले. तथा ले. से. के एक प्रशिक्षण विद्यालय, अवासीय सह टयूटोरियल संस्थान की स्थापना की। भा. ले. तथा ले. से. के एक प्रतिष्ठित अधिकारी श्री पी. के.वाटल जिन्होने स्थानीय सरकार में महालेखाकार तथा वित्तीय सचिव के रूप में कार्य किया था, इसके मुखिया थे।

1949 की भा. ले. तथा ले. से. परीक्षा में सफल घोषित किए गए अभ्यार्थियों में से चुने गए परिवीक्षकों का पहला बैच 1950 में इस स्कूल में शामिल हुआ तथा इन्होंने (ए. जी.), पंजाब मे हुए व्यावहारिक प्रशिक्षण सहित 48 माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा इन्हें अक्तूबर- नवम्बर 1951 में हुई विभागीय परीक्षा के बाद विभिन्न महालेखाकार कार्यालयों में कार्यभार संभालने के लिए भेज दिया गया।

परिवीक्षकों के अगले बैच ने यारोज, शिमला में कार्यभार ग्रहण किया। इनके प्रशिक्षण की समाप्ति के पश्चात्, फरवरी 1953, में यह स्कूल मद्रास स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ के प्रमुख श्री वी. के. सुब्रहमण्यम. आपातकालीन कैडर सें सेवानिवृत अधिकारी थे, जिन्होंने ए. जी. मद्रास के समग्र निरीक्षण में कार्य किया। परिवीक्षकों के दो बैच- 1952 तथा 1953 ने मद्रास में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

अक्तूबर 1955 में स्कूल को वापिस शिमला स्थानातंरित कर दिया गया तथा 19 भा. ले. तथा ले. से. परिवीक्षकों ने तथा 6 भा. रे. ले. से.(I.R.A.S.) परिवीक्षकों ने यारोज में कार्यभार ग्रहण किया। श्री जी, मैथियाज उस समय प्रमुख थे।  1957 बैच के 29 परिवीक्षकों के आवास के लिए निकटवर्ती इमारत, यारोज विला को किराए पर लिया गया। गोर्टन कैसल में कक्षा लगाने तथा मुखिया के कार्यालय के लिए 10 कमरे समायोजित किए गए।

अक्तूबर 1974 में स्टॉफ कालेज को गार्टन कैसल के निकट ऐतिहासिक रेलवे बिल्ड़िंग में स्थानांतरित कर दिया गया जहाँ यह 1999 तक रही। इस दौरान 1990 में इसे राष्ट्रीय लेखा तथा लेखा परीक्षा अकादमी के रूप में अपग्रेड किया गया। अकादमी इसके वर्तमान स्थान चौड़ा मैदान मे दिसम्बर 2000 में स्थानातंरित की गई।

अकादमी की शुरूआत से, भा. ले. तथा ले. से.के 62 से अधिक बैच के अधिकारी अकादमी में बहुमुखी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं तथा भारत के नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक को उसके संवैधानिक तथा कानूनी उत्तरदायित्वों का वहन करने में अपना सहयोग दे रहे है। 1950 के दशक के मध्य के दौरान, भारतीय रेल सेवा के परिवीक्षक भी, भा. ले. तथा ले. से. परिवीक्षकों के साथ प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। जबकि भारतीय लोक लेखा सेवा के अधिकारी भी 1984 से 1992 के दौरान यहाँ प्रशिक्षित किए गए। अकादमी विदेशों से जैसे- नेपाल, भूटान तथा ओमान के अधिकारियों को भी प्रशिक्षित कर चुकी है।