यारोज – आवासीय परिसर

यारोज 1950 से प्रशिक्षु अधिकारियों का अवासीय परिसर है। इमारत के वर्तमान ढांचे को शायद 1913 में सर हरबर्ट बेकर द्वारा डिज़ायन किया गया था। सुंदर लॉन तथा प्राकृतिक सुंदरता से सुशोभित इसकी स्विस शैली की वास्तुकला प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रथम दृष्टि से ही घर जैसा महसूस करवाती है। Central heating System   के साथ लकडी की संरचना और मोटी दीवारें आवास को शिमला की महाठंड  के दौरान भी गर्म रखती है कमरों को आरामदायक बनाने के लिए प्रत्येक कमरे को सभी आवश्यक सामग्री से सुसज्जित किया गया है। यारोज़ में एक शाही लांउज भी है जो अब तक कई दिग्गजों तथा मेहमानों की मेजबानी कर चुका है। इसके साथ लगते बिलियर्डस कक्ष का पूरे परीसर की तरह ही अपना अलग इतिहास है.. आधुनिक तरीके से स्थापित किया गया रसोईघर प्रशिक्षु अधिकारियों तथा अकादमी में आने वाले संकाय सदस्यों तथा विभिन्न पाठ्यक्रमों में भाग लेने वाले सेवाकालीन प्रशिक्षण के दौरान सिडार तथा ग्लेन में ठहरने वाले अधिकारियों की भोजन संबंधी आवश्यकताओें को पूरा करता है।

इसके निवासियों के मनोरंजन के लिए, टी. वी. कक्ष, संगीत कक्ष तथा विभिन्न प्रकार के संगीत उपकरण तथा तबला, एवं खेल प्रेमियों के लिए आधुनिक सिंथेटिक टर्फ टेनिस कोर्ट उपलब्ध है। प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए यह केवल छात्रावास परिसर नही है बल्कि एक घर है, जो उनको भद्र  पुरूष तथा महिला अधिकारी बनाने में एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है..

घर से दूर एक घर

यह सुंदर है, यह भव्य है तथा यह आकर्षक है… तथा और भी बेहतर तरीके से कहें तो – यह एक घर है। यह स्थान परिर्वतन रहित है यह समय रूपी नदी में एक ठहरा हुआ क्षण है – यह एक बूंद है जो हिमालय की शिवालिक श्रेणी में वर्षों से जमी हुई है ताकि यहां आने वाले इसकी प्रशंसा कर सकें। यारोज जो कि भारतीय लेखापरीक्षा तथा लेखा सेवा अधिकारियों की विभिन्न पीढियों का घर है … शिमला की बर्फ से ढकी शांत चोटी पर देवदार के पेड़ की भांति औपनिवेशिक युग की एक सुंदर इमारत है।

यारोज को शायद 1913 में सर हरबर्ट बेकर द्वारा डिजायन किया गया था। सर बेकर दिल्ली सचिवालय की इमारत के दक्षिणी तथा उतरी खंडों को तथा साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति के अधिकारिक निवास को डिज़ायन करने के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने लिखा है ’’मेरे दिल्ली के काम से एक सुखद बदलाव सर जार्ज के लिए शिमला में एक घर का निर्माण करना था। एक लंबा, छोटा हॉल शिमला की शरद ऋतु में स्वर्ण तलहटी से, विशालकाय खिडकियों तथा राजसी देवदार के पेडों के मध्य से सुन्दर लॉन और बर्फीली पहाडियों को देखता है।

सर लोनडेस भारत के वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य थे। यारोज भारत के वायसराय के वित्तिय सचिव का घर भी था तथा कुछ समय के लिए जिन्नाह परिवार का गर्मियों का आवास स्थान भी था। यारोज के वास्तविक फूल इनवर नैस में पाए जाते है, यारोज झील कहीं पर विक शहर के आस-पास पाई जाती है। यारोज नाम की उत्पति शायद ‘यार-हॉव‘ से हुई है जिसका अर्थ होता है ’मछली पकडने के लिए बनाए गए जाल की मेड़।’

इस इमारत का नाम यारोज शायद यारों फूल क नाम पर पड़ा जो (एकिलिया माइलफोलियम), हल्का खुशबुदार, जालीदार पत्तों वाल पौधा होता है जिस पर डे़ज़ी जैसे फूल होते हैं जो उपर से गोल कोरिबंस की तरह होते हैं। इस पौधे को अनेक प्रकार से प्रयोग किया जाता है। एक समय पर यह सर्दी लगने के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता था तथा एक टॉनिक के रूप में भी प्रयोग किया जाता था, इसका प्रयोग घाव का उपचार करने तथा नाक के रक्त स्त्राव को रोकने के लिए किया जाता था। तथा यह कहा जाता था कि इसके द्वारा राक्षसी/भूत के प्रभाव का इलाज किया जा सकता है। इसका प्रयोग यह जांचने के लिए भी किया जाता है कि किसी का प्यार सच्चा है या नही।

वर्ड़सवर्थ के अनुसार यारोज एक जड़ी बुटी होती है जो कि बडी आसानी से स्वयं ही उग जाती है। यह खुशबुदार, जाली जैसे पत्तों वाला पौधा होता है जिस पर छोटे सपाट फूल लगते हैं।

प्राचीन समय में, यारो का प्रयोग दवाई के रूप मे घाव का उपचार करने तथा रक्त स्त्राव को रोकने के लिए किया जाता था। यह देवता  ‘अर्स‘ को अर्पित किए जाते थे तथा इसे विशेष रूप से देव तुल्य योद्धा ‘एक्लिस‘के साथ संबधित किया गया है जिसके नाम पर इस फूल का नाम ‘एक्लिस‘ रखा गया। यह कहा जाता है कि इस फूल की उत्पति ‘एक्लिस‘ के भाले से गिरी धूल से हुई, जिसका प्रयोग ‘एक्लिस‘ ने एक घायल किन्नर का उपचार करने के लिए किया जिसको स्वयं उसने ही घायल किया था। योद्घाओं के साथ इसका संबंध युगों से ऐसे ही चला आ रहा है। इसलिए इस फूल को इन नामों जैसे- शाल्जर्स वाउंडर्वट (योद्घाओं के घावो को भरने वाला), तीव्र र्बीड, सेना बूटी, कैनीटन या योधाओ का पौधा, मिलीटरीस द्वारा भी जाना जाता है। युद्घ में साहस तथा घायल होने से बचने के लिए जादुई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे अपने साथ ले जाया जाता था। इस फूल से संबंधित दो अंग्रेजी पद्य हैः

If my love do not love me, it won’t bleed a drop,

If my love loves me,‘t will bleed every drop.

स्पष्ट रूप से यारो का प्रयोग यह जांचने के लिए किया जाता था कि आपका प्यार सच्चा है! इसके लिए, यारो का एक टुकडा नाक के उपर रखा जाता था, अगर नाक से खून आया तो आपका प्रेमी सच्चा है, अगर नाक से खून नहीं आया तो आपका प्रेमी बेवफा है!!

Yarrow, sweet yarrow, the first I have found,

In the name of Jesus Christ, I pluck it from the ground.

As Jesus loved sweet Mary & took her for his dear,

So in a dream this night, I hope my true love will appear.

यह माना जाता है कि यारो फूल का एक गुच्छा तोड़कर अपने तकिये के नीचे रखकर सोने से आपके बिछड़े हुए प्यार से सपने में आपकी मुलाकात होगी… अंत में, अगर यारो से बनी चाय का एक टॉनिक चर्च के अन्दर लिया जाए तो इसे राक्षसी प्रभाव से बचने का महत्वपूर्ण इलाज माना जाता है।