भा. ले. तथा ले. से. प्रशिक्षु अधिकारियों का प्रशिक्षण

भारत के नियंत्रक तथा महालेखापरीक्षक के विस्तृत जनादेश के पालन के लिए भा. ले. तथा ले. से. को इस प्रकार के अधिकारियों की आवश्यकता होती है जो भा. ले. तथा ले. वि. में उच्चतम प्रबंधकीय स्तर के हो ताकि लेखा, लेखा परीक्षा तथा प्रशासन के लिए उच्चतम पेशेवर कौशल प्राप्त हो सके। सर्वोच्च लेखा परीक्षा सस्ंथानों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन के एक महत्त्वपूर्ण सदस्य के रूप में भारत के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान के उद्भव से भा. ले. तथा ले. से. अपने अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए सबसे अधिक व्यावसायिक कौशल प्राप्त करने का आदेश देता है। अकादमी वह नर्सरी है, जहाँ यह कौशल प्रदान किए जाते हैं तथा इन्हें सामयिक बनाये जाए।

प्रशिक्षु अधिकारी (प्र.अ.) विभिन्न संस्थानों से बुनियादी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए अकादमी में कार्यभार ग्रहण करते हैं। यह व्यावसायिक प्रशिक्षण 94 सप्ताह का होता है। जिसमें- चरण -1 (क) जो कि (54 सप्ताह) का होता है, में सैंद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान दिया जाता हैं तथा उनका प्रशिक्षु अधिकारी से पेशेवर अधिकारी तक का विकास होता है। (ब) सेवाकालीन प्रशिक्षण (32+2 सप्ताह)- इस दौरान महालेखाकार कार्यालयों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, तथा (स) चरण- 2 (6 सप्ताह)- इसमें प्रशिक्षु अधिकारियों के सेवाकालीन प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने तथा उप  महालेखाकार के रूप में क्षेत्र में उनकी नियुक्ति से पहले दिया जाने वाला प्रशिक्षण शामिल होता है। प्रशिक्षण के इन घटकों को नीचे बताया गया है।

चरण 1

प्रथम चरण का प्रशिक्षण, जो दो अर्धवार्षिक पाठ्यक्रमों में होता है, का उद्देश्य लेखांकन, लेखापरीक्षा तथा कार्मिक प्रशासन (personnel Administration) का सैंद्धांतिक ज्ञान प्रदान करना विभिन्न अकादमीक विषयों पर कक्षा – सत्रों के साथ-2 इस अवस्था में अंर्तव्यक्तिगत कौशलों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है तथा खेलों, संस्कृति तथा अन्य पाठ्येतर गतिविधियों के द्वारा व्यक्तिगत विकास किया जाता है इस प्रशिक्षण का एक अन्य उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न सामाजिक मुद्धों से परिचित करवाना है। जिनको समझना एक सरकारी कर्मचारी के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। प्रथम अर्धवार्षिक पाठ्यक्रम में शामिल विषय पब्लिक फाईनेस विद् इंटरोडक्टरी इक्नामिक्स, ग्वरमैंट अकांउटस, कमरशियल अंकाउटस, बुक किपिंग इन प्राईवेट सैक्टर, प्रिसिंप्लस ऑफ पब्लिक सैक्टर ऑडिटिंग, पब्लिक एक्सपेंडिचर, रेवन्यू एड़ रिर्सोस मेनेजमैंट, इनफारमेशन सिस्टम ऑडिटिंग तथा हिन्दी। द्वितीय अर्धवार्षिक पाठ्यक्रम में शामिल होने वाले विषय हैं- प्राईवेट सैक्टर फाईनैंशियल रिर्पोटिंग, पब्लिक सैक्टर फाईनैशियल रिर्पोटिंग, कोस्ट एंड़ मैनेजमेंट अंकाउटिग, कंपलांयस एंड परफोमैंस ऑडिटिंग, फाइनेशियल ऑडिटिंग तथा इनफरमेशन सिस्टमस ऑडिट।

प्रथम चरण के दौरान प्रदान किया जाने वाला प्रशिक्षण केवल अकादमी तथा भा. ले. तथा ले. वि. के प्रमुख केंद्रों जैसे सूचना प्रणाली तथा लेखा परीक्षा का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आई. सी. आई. एस. ए.) तथा पर्यावरण लेखापरीक्षा और विकास का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आई.सी.इ. डी.) द्वारा ही प्रदान नहीं किया जाता बल्कि कई अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक अकादमिक संस्थानों जैसे सार्वजनिक वित्त और निति का राष्ट्रीय संस्थान (एन. आई. पी. एफ. पी.) संसदीय अध्यनन तथा प्रशिक्षण ब्यूरो (बी. पी. एस. टी.), भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (से. ई. बी. आई.) टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थाान, भारतीय प्रबंधन संस्थान (भा. प्र. सं.) अहमदाबाद में भी प्रदान किया जाता है।

इस चरण के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों के सृजनात्मक साहित्यिक कौशलों का विकास दो पत्रिकाओं ‘yarrows Dew‘ तथा ‘Academy calling‘ द्वारा किया जाता है जिनका प्रकाशन उनके द्वारा ही किया जाता है तथा इसके साथ-साथ किसी उपयुक्त सामाजिक विषय पर उनके द्वारा डैक्यूमैंटरी फिल्म भी बनाई जाती है। प्रशिक्षु अधिकारियों से पर्यावरण सुरक्षा कार्यक्रमों में भाग लेने की अपेक्षा भी की जाती है, तथा अकादमी द्वारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न संरचित कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों से बातचीत करने का अवसर प्रदान किया जाता हैं। द्वितीय अर्धवार्षिक पाठ्यक्रम के अंत में अधिकारियों को तीन सप्ताह के शैक्षणिक दौरे पर भेजा जाता है जिस दौरान उन्हें महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, तथा निकायों तथा सांस्कृतिक स्थानों तथा देश के विभिन्न भागों में अवस्थित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थानों इत्यादि के कार्यों को समझने का अवसर प्रदान किया जाता है।

सेवाकालीन प्रशिक्षण

सेवाकालीन प्रशिक्षण जो लगभग आठ माह तक चलता है, का उद्देश्य सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक कार्य के बीच के अंतर को खत्म करने के लिए एक पुल की तरह कार्य करना है। प्रशिक्षु अधिकारी विभिन्न राज्यों महालेखाकार कार्यालयों से जुड़ें होते हैं। प्रशिक्षण लेखा, लेखापरीक्षा तथा हकदारी कार्यों के अनुसार अलग-अलग विभाजित होता है। प्रशिक्षण के प्रत्येक भाग के अंत, में जो कि 16 सप्ताह का होता है, प्रशिक्षु अधिकारी वापिस अकादमी में अपने अनुभवों को साझा करने वाले सत्र में शामिल होते हैं।

यह सीखने का अत्यंत महत्त्वपूर्ण अवसर होता है क्योंकि प्रशिक्षु अधिकारियों को सभी विभागों तथा सभी स्तरों पर कार्यालयों के प्रशासनिक तथा कार्मिक मुद्धों को समझने का अवसर प्राप्त होता है। उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां जैसे लेखापरीक्षा दलों का नेतृत्व करना, शाखा अधिकारी या सहायक  जन सूचना अधिकारी के रूप में कार्य करना आदि निर्दिष्ट की जाती है। अकादमी के निदेशक प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए परामर्शदाता की तरह कार्य करते हैं तथा प्रशिक्षु अधिकारियों के लगातार संपर्क में रहते है ताकि आवश्यकतानुसार उनका मार्गदर्शन कर सकें।

व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षु अधिकारियों  को लेखा परीक्षा दल के साथ कार्यक्षेत्र में भेजा जाता है। विभिन्न कार्यकारिणी तथा शासकीय लेखांकन समीतियों के साथ प्रशिक्षु अधिकारियों को अधिवेशन (meetings) में शामिल करवाने का प्रयास करवाया जाता है। इस प्रशिक्षण का उदे्श्य विभिन्न राज्यों के महालेखाकार कार्यालयों में कार्यप्रणाली की विस्तृत तथा संपूर्ण समझ प्रदान करना होता है। यह सरकार के विभिन्न विभागों के बहुपक्षीय कार्यप्रणाली को समझने का तथा सरकारी प्रणाली में उस विभाग की भूमिका को समझने का भी अवसर प्रदान करती है।

व्यक्तिगत  स्तर पर प्राप्त किए गए ज्ञान के अतिरिक्त विभिन्न प्रशिक्षण चरणों के अंत में आयोजित किए गए अनुभव साझा करने वाले सत्रों तथा कार्यक्षेत्र में आने वाली विभिन्न समस्याओं के बारे मे वाद-विवाद सामूहिक रूप से सीखने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। सेवाकालीन प्रशिक्षण उस प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग होता है जिस दौरान प्रशिक्षु अधिकारी एक अधिकारी के रूप में उभरते है।

चरण – 2

सेवाकालीन प्रशिक्षण समाप्त होने पर प्रशिक्षण का दूसरा चरण प्रारंभ हो जाता है जो कि सैंडविच पैर्टन पर आधारित होता है। प्रशिक्षु अधिकारी अपने अनुभवों को साझा करने के लिए अकादमी में वापिस आते है एवं विचार-मंथन द्वारा सृजनात्मक समाधान सुझाकर तथा मौलिक विचारों द्वारा कार्यक्षेत्र में आने वाली समस्याओं का हल सुझाते हैं। चरण -2 के व्याख्यान, कार्यकलाप तथा कार्यभार प्रथम चरण तथा सेवाकालीन प्रशिक्षण के दौरान भारतीय लेखा परीक्षा तथा लेखांकन के कार्यों के ज्ञान तथा अनुभव को मजबूत तथा सुदृढ़ करने पर केंद्रित होते हैं। प्रशासन तथा कर्मिक कार्यों से संबधित विभिन्न मुद्धे जिनका

प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न कार्यालयों मे कार्यभार ग्रहण करने पर सामना करना पड़ता है पर भी चर्चा की जाती है। समूह प्रस्तुति (Group presentation) केस स्टड़ी तथा विचार- विमर्श (Discussion) के माध्यम से विचारों तथा अनुभवों के आदान- प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया जाता हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों में नेतृत्व के गुणों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षु अधिकारियों को अकादमी में आने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों के वरिष्ठ बैच के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत करने का अवसर मिलता है। वे खेल प्रतियोगिता करते हैं, तथा अपने सेवा सहयोगियों के साथ अच्छे संबंध तथा सहानुभूति बनाते हैं।

दूसरे चरण का एक अत्ंयत महत्त्वपूर्ण घटक विदेशी (एस.ए.आई.) से सम्बद्ध होना होता है जहाँ पर प्रशिक्षु अधिकारियों को किसी विदेशी सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थान के शैक्षिक भ्रमण पर भेजा जाता है ताकि अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को समझने से उनके ज्ञान में वृद्धि हो सके।

अकादमी ने 1990 बैच से प्रशिक्षु अधिकारियों से सतत् कार्य संपादन पर अधारित सर्वांगीण प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए पदक (Medals) तथा प्रमाण पत्र प्रदान करना शुरू किया। तीन सबसे योग्य प्रशिक्षु अधिकारियों को विदाई समारोह में सम्मानित किया जाता है। विदाई समारोह से चरण-2 का प्रशिक्षण समाप्त हो जाता है जिसके बाद सभी प्रशिक्षु अधिकारी अपने- अपने निर्दिष्ट कार्यालयों में उप महालेखाकार के रूप में पद ग्रहण करते है।