भा. ले. तथा ले. से. के बारे में

भारतीय लेखापरीक्षा तथा लेखा सेवा, (भा. ले. तथा ले. से.) भारतीय संघ के एक औपचारिक लोक सेवा (वर्ग-क) संगठन के मध्य तथा उच्च स्तर के प्रबंधन कार्य करता है। जिसके माध्यम से भारतीय नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक अपने जनादेश संबधी कार्य करता है। इसके निम्न स्तर में वर्ग- (ब) तथा इससे निम्न वर्ग के अधिकारी शामिल होते हैं। यह तीनों स्तर मिलकर भारतीय लेखापरीक्षा तथा लेखा विभाग बनाते हैं।

भारतीय संविधान भारत के नि. तथा म. प. संस्थान के आधारभूत ढ़ाचे की व्याख्या करता है कि भारत का नि. तथा म. प. विभाग एक स्वतत्रं संवैधानिक प्राधिकरण है जो कि न तो विधायिका तथा न हि कार्यपालिका का भाग है। नि. तथा म. प. राज्यों का लेखांकन प्राधिकरण है। नि. तथा म. प. के इस जनादेश को भा. ले. तथा ले.से. द्वारा संपन्न  करवाया जाता है। जो राज्यों के लेखाओं के संकलन तथा केन्द्र  तथा राज्य दोनों के लेखापरीक्षण का कार्य करता है।

लेखांकन के लिए राज्य का महालेखाकार कार्यालय राज्य लेखांओं का संकलन करता है। ये कार्यालय राज्य सरकार कर्मचारियों के हकदारी से संबंधित कार्य जैसे- पेंशन तथा भविष्य निधि भी करते है तथा कुछ राज्यों में किसी विशेष राज्य के अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के राजपत्रित हकदारी संबंधी कार्यों का भी ध्यान रखते हैं। इस प्रकार यह कार्यालय महालेखाकार कार्यालय (लेखा तथा हकदारी) कहलाता है। कुछ राज्यों में हकदारी से संबंधित कार्य राज्य सरकार को निर्दिष्ट किए गए हैं।

लेखा परीक्षण के अनुसार यह दो अलग-अलग ढाँचे में विभाजित होता है। महालेखाकार (लेखा परीक्षा) का कार्य राज्य सरकार की गतिविधियों का लेखापरीक्षण करना है, जबकि प्रधान निदेशक कार्यालय (लेखा परीक्षा) केंद्रीय सरकार की गतिविधियों का लेखा-परीक्षण करता है। प्रत्येक राज्य का एक महालेखाकार (लेखा परीक्षा) कार्यालय होता हैं। जबकि प्रधान निदेशक (लेखापरीक्षा) का कार्यालय क्षेत्रीय आधार पर होता है जिसमें एक से अधिक राज्य शामिल हो सकते हैं। विभिन्न प्रभारों को देखने वाले अधिकारियों के आधार पर अलग-अलग मामलों के अनुसार प्रधान महालेखाकार या महानिदेशक के कार्यालय भी अलग होते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के साथ-साथ भा. ले. तथा ले.वि. ने अपने तीन अंतर्राष्ट्रीय कार्यालयों जो कि कुआलालंपुर, लंदन तथा वांशिगटन डी. सी. में है, के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है। भारत के नि. तथा म. प. को अंतर्राष्ट्रीय निकायों जैसे- संयुक्त राष्ट्र के लेखा परीक्षण का कार्य भार सौंपा गया।

भारतीय लेखापरीक्षा तथा लेखा सेवा अधिकारी निश्चित समय पर पदोन्नति करता रहता हैं। एक भा. ले. तथा ले. से. अधिकारी विभाग में उपमहालेखाकार  के रूप में कार्यभार ग्रहण करता है तथा कुछ समय बाद वह वरिष्ठ उप महालेखाकार (व.म.प.) के रूप में पदोन्नत हो जाते हैं, फिर महालेखाकार, प्रमुख महालेखाकार (प्र.म.ले.), अतिरिक्त उपमहा नि. ले. प. के रूप में पदोन्नत होते रहते है जैसा कि ऊपर वर्णन किया गया है, महालेखाकार तथा प्रधान महालेखाकार के पद केंद्रिय कार्यकारिणी में प्रधान निदेशक (प्र. नि.), तथा महानिदेशक (प्र. नि.) के पद के समकक्ष होते हैं।