पाठयेत्तर क्रिया-कलाप

अकादमी शिशु देखभाल केंद्र (NAAA Child care centre)

जब तक लाखों लोग भूखे तथा अज्ञानता में है, मैं इसके लिए उस प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेवार ठहराता हूँ जो कि उनके खर्च पर शिक्षित हुए है परंतु उनकी तरफ थोड़ा सा भी ध्यान नही दे रहे –
स्वामी विवेकानंद

2012 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने शिमला के प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए एक शिशु देखभाल केंद्र (Creche) की शुरूआत की थी। यह समाज को कुछ वापिस देने का एक माध्यम था तथा यह एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभरा जिससे कि प्रशिक्षु अधिकारी समाजिक जिम्मेदारियों को समझ सके। इस केंद्र की स्थापना से पहले प्रशिक्षु अधिकारियों ने दिल्ली के एक N.G.O. द्वारा संचालित ‘मोबाईल क्रैच सैंटर’ नामक एक शिशु देखभाल केंद्र का दौरा किया तथा इनसे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

अधिकारियों तथा अकादमी के स्टाफ द्वारा किए एक आर्थिक योगदान से इस कार्य के लिए कोष का निर्माण किया गया। 6 मार्च 2013, को जस्टिस कुरियन जौजफ (हिमाचल प्रदेश के पूर्व प्रमुख जस्टिस  तथा सर्वोच्च न्यायलय के जज) ने प्रधान महालेखाकार (हिमाचल प्रदेश) की उपस्थिति में औपचारिक रूप से राष्ट्रीय लेखापरीक्षा तथा लेखा अकादमी शिशु देखभाल केंद्र का उद्घाटन किया। एक अनुभवी महिला प्रभारी तथा प्रवासी मजदूरों के चार बच्चों के साथ केंद्र की शुरूआत की गई।

इस सुविधा का आगे आने वाले बैच ने आगे बढ़ाया। हर बैच ने अपना योगदान जैसे एक कंप्यूटर लगाना, बच्चों के लाने तथा ले जाने के लिए यातायात के साधनों की व्यवस्था करना, शिशु देखभाल केंद्र  में पेटं करवाना, खिलौनो तथा पोषक भोजन की व्यवस्था करना के रूप में दिया। वर्तमान में केंद्र में 15 बच्चे हैं। सभी खर्चो को वहन प्रशिक्षु अधिकारियों, निदेशकों, महानिदेशक तथा स्टाफ द्वारा किए गए मासिक योगदान के आधार पर किया जाता है।

रक्तदान शिविर

सोशल आउटरीच कमेटी द्वारा वार्षिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज (I.G.M.C.) शिमला की रक्तदान समीति इस गतिविधि को संपन्न कराती है। राष्ट्रीय लेखापरीक्षा तथा लेखा अकादमी के रक्तदाताओं के लिए यारोज में तथा महालेखाकार कार्यालय, हिमाचल के रक्तदाताओं के लिए महालेखाकार कार्यालय में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। रक्तदान से इक्ठ्ठे किए गए रक्त को वर्गीकृत करके आई. जी. एम. सी. शिमला में जमा करवाया जाता है। रक्तदाताओं को अल्पाहार प्रदान किया जाता है तथा आभार का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है।

कपडों का वितरण (Distribution of clothes)

दयालुता का छोटा सा कार्य प्रार्थना के लिए झुकने वाले हजारो सिरों की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है
महात्मा गांधी

शिशु देखभाल केंद्र के बच्चों तथा प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए कपडों का वितरण सोशल आउटरीच कमेटी की विभिन्न गतिविधियों में से एक है। आउटरीच फंड का एक मुख्य भाग जंरूरतमंद बच्चों को सर्दियों के कपडों के वितरण पर खर्च किया जाता है। यह वितरण मुख्यतः सर्दी की शुरूआत से पहले किया जाता है, ताकि बच्चों को शिमला की हाड़ कंपा देने वाली ठंड से बचाया जा सके। फंड की उपलब्धता के अनुसार विभिन्न अवसरों जैसे – गणतंत्र दिवस तथा स्वतंत्रता दिवस पर नए कपडे भी प्रदान किए जाते है।