महानिदेशक का सन्देश

राष्ट्रीय लेखापरीक्षा तथा लेखा अकादमी, भारतीय लेखापरीक्षा तथा लेखा विभाग (भा.ले. तथा ले. वि.) का एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है जो 1950 से अब तक भा.ले. तथा ले. वि. के परिवीक्षकों के 60 से अधिक बैच को प्रशिक्षित कर चुका है। अपने प्रशिक्षण के माध्यम से अकादमी ने अपने मोटो- लोक हितार्थ सत्यानिष्ठा (लोगों के कल्याण के लिए सत्य के प्रति प्रतिबद्धता) पर पूर्ण ध्यान केंद्रितकरते हुए सर्वोत्कृष्ठ पेशेवर लेखापरीक्षक तैयार किए हैं। ये अधिकारी सूचनात्मक, गहन तथा रचनात्मक लेखापरीक्षा रिपोर्ट तैयार कर रहे है, जो अत्यधिक विश्वसनीय होती है। अपने काम के माध्यम से इन अधिकारियों ने भारतीय लेखापरीक्षा तथा लेखा विभाग (भा.ले. तथा ले. वि) को देश के सुशासन के लिए उत्प्रेरक के रूप में स्थापित करने का कार्य किया है।

जीवन कभी न समाप्त होने वाली ज्ञान ग्रहण करने की एक यात्रा है तथा अकादमी में हम हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहते हैं। हम हमेशा अपनी कार्यप्रणाली तथा अभ्यास के तरीकों मे संशोधन करते है ताकि हम सर्वश्रेष्ठ भा.ले. तथा ले. से परिवीक्षक तैयार कर सके। भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग की महान विरासत के बारे मे सचेत रहते हुए भा.ले. तथा ले. से. के अनुक्रमिक (successive) बैच के अधिकारी इस विरासत को सभांलने में अपना योगदान दे रहे हैं तथा इसका भाग बने है। मैं इस बात से पूर्ण आश्वस्त हूँ कि आने वाले अधिकारी भी इस पंरम्परा का पालन करेगें।

वाय.एन. ठाकरे

महानिदेशक

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक राष्ट्रीय लेखा अकादमी और लेखा परीक्षा में जाते हैं

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भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, श्री राजीव मेहरिशि 1 9 जनवरी, 2018 को अकादमी की अपनी पहली मुलाकात पर महानिदेशक, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और लेखा के साथ बातचीत करते हुए